यदि नाविक और स्टैंडर्ड जीपीएस मिलकर काम करते हैं, तो इससे नेविगेशन बहुत सटीक हो जाएगा।

इसरो ने देश के लोगों के लिए पहला डिजिटल मैप नाविक (Navic) तैयार किया है। जो गूगल मैप्स को भी टक्कर देने वाला है

सन 1999 के कारगिल युद्ध में भारत ने पाकिस्तानी सैनिकों की लोकेशन की जानकारी हासिल करने के लिए इस तकनीक की भारत को बड़ी आवश्यकता थी। जिसके लिए भारत ने अमेरिका से मदद भी मांगी थी, लेकिन अमेरिका ने इसके लिए साफ मना कर दिया था। उसी के बाद भारत ने इस  सिस्टम को तैयार करने पर विचार किया था।

इसरो ने नाविक के लिए पहली सैटेलाइट 1 जुलाई, 2013 को आईआरएनएसएस-1ए का प्रक्षेपित किया था। इस मैप्स को क्वालकॉम के प्रोसेसर वाले स्मार्टफोन में भी इस्तेमाल कर सकेंगे वहीं, लोग देशी मैप को 2020 से में इस्तेमाल करने के बाद यूजर्स सटीक लोकेशन की जानकारी हासिल कर सकेंगे।

क्वालकॉम की लोकेशन बेस्ड टेक्नोलॉजी इस समय भारत के सात सैटेलाइट्स के साथ काम कर रही हैं। नाविक मैप में एक चिपसेट के साथ नाविक प्लेटफॉर्म को IRNSS तकनीक का सपोर्ट भी मिलेगा। यह सेवा कुछ चुनिंदा स्मार्टफोन और ऑटोमोटिव यूजर्स के लिए उपलब्ध हैं।

12 अप्रैल को आईआरएनएस सीरीज की सातवीं सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण के साथ नाविक के लिए आवश्यक सूचना तंत्र पूरा हो गया था। हालांकि इसे और ज्यादा सटीक जानकारी वाला बनाने के लिए भविष्य में सैटेलाइट की संख्या बढ़ाकर 11 करने की योजना है।

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