इसके एस और एल बैंड वाले कैमरों ने बेहद सूक्ष्म तरीके से चांद की सतह की तस्वीरें उतारीं।

चंद्रयान-2 उल्का पिंडों, क्षुद्र गहों, धूमकेतुओं की बमबारी के चलते चांद पर बने बडे़-बडे़ गड्ढों का पता लगाया

चांद के चारो ओर चक्कर लगा रहे चंद्रयान-2 ने अपने अपर्चर रडार ने जो तस्वीरें खींची हैं उसकी पड़ताल करने पर पता चला है कि अपने विकास के समय से ही चांद की सतह पर उल्का पिंडों, क्षुद्र ग्रहों और धूमकेतुओं की भरी मात्रा में विस्फोट हुए । जिस कारन चांद की सतह पर काफी मात्रा में विशाल गड्ढे बन गए। ये गड्ढे गोलाकार और बड़े कटोरे जैसे आकार में हैं। इनमे से कुछ छोटे, कुछ सामान्य तो कई बडे़ और छल्लेदार आकार भी हैं।

चंद्रयान-2 का अपर्चर रडार जो सिग्नल भेजता है, वह चांद की सतह के भीतर तक पहुंचकर जानकारी जुटाता है। यह सतह की उबड़-खाबड़ बनावट, संरचना का पता लगता है और इसके बनने अध्ययन में यह पता लगता है की इस के बनने में किन तत्वों और पदार्थों का इस्तेमाल हुआ है, इसरो ने चांद के रहस्य खोजने में चंद्रयान-2 के रडार ने यह भी जानकारी प्राप्त की है कि चाँद पर बने ज्वालामुखी वाले गड्ढों के बनने की वजह से उसके अंदरूनी टकराव और विस्फोट से हैं। जिस कारण इसके आंतरिक हिस्सों में कुछ छल्ले बन गए। चंद्रयान-2 के एसएआर रडार जो किसी ग्रहीय सतह और उसके भीतरी हिस्से की बनावट का पता लगा सकता है यहाँ एक ताकतवर रिमोट सेंसिंग उपकरण है,

इस रडार ने चांद की सतह के इन ज्वालामुखी वाले गड्ढों की प्रकृति, आकार, वितरण इत्यादि का पता लगाया है तथा इसकेइसके एस और एल बैंड वाले कैमरों ने गड्ढों की भौतिक बनावट की तस्वीरें भी लेने में कामयाबी पाई है। उन्नत किस्म के ये कैमरे अक्सर चांद के ध्रुवीय इलाकों की तस्वीरें भेजेगा, जिससे बर्फ और पानी की संभावना का भी पता लगाया जा सकेगा। इससे पहले चंद्रयान-1 और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चांद की सतह पर गड्ढों की जो जानकारी भेजी थी वह व्यापक संदर्भों की नहीं थी। अब चंद्रयान-2 के रडार ने चांद की बनावट की व्यापक तस्वीर पेश की है और क्षुद्र ग्रहों, उल्का पिंडों और धूमकेतुओं से चांद की सतह पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
चांद के दक्षिणी ध्रुव में ली गई तस्वीरों में उल्का पिंडों, क्षुद्र गहों, धूमकेतुओं की बमबारी से बने गड्ढे जिन्हें लाल रंग से दर्शाया गया है उस सतह पर नियमित अंतराल पर विशालकाय पिंडों की बौछारें पड़ीं। वहीं, नीले रंग से यह दर्शाया गया है कि सतह पर रुक-रुककर पिंडों की बारिश हुई। जबकि, हरे रंग से यह दर्शाया गया है कि व्यापक मात्रा में पिंडों की बमबारी हुई।

Similar News

Sign up for the Newsletter

Join our newsletter and get updates in your inbox. We won’t spam you and we respect your privacy.