जल्लीकट्टू : एस हरीश और आर जयकुमार की किताब माओइिस्ट पर आधारित फिल्म है।

जल्लीकट्टू एक ऐसी फिल्म जिसकी मुख्य किरदार एक भैंस है जो अपनी जान बचाने की कोशिश करती है।

इस फिल्म की कहानी का मेन किरदार एक भैंस है जो अपनी जान बचाने की कोशिश कर रही है जिसके चलते पूरे गांव में हडकंप मचा रहता है. डायरेक्टर लिजो जोस पेल्लीसेरी द्वारा बनी दक्षिण भारतीय की फिल्म जलीकट्टू एक चर्चा का विषय बनी हुई है जिसका मेन किरदार एक भैंस है जो अपनी जान बचाने की कोशिश कर रही है जिसके चलते पूरे गांव में हडकंप मचा रहता है।

इस फिल्म की कहानी के अनुसार वार्के और एंटनी नाम के दो आदमी एक कसाईखाना चलाते हैं जहां भैंसों को मारकर उन्हें बेच दिया जाता है. एक रात को एक भैंस वहां से गायब हो जाती है और पूरे गांव में हुडदंग मचाने लगती है. गांववाले उस स्थिति को काबू में करने की कोशिश करते हैं जिसके लिए एक एक्स स्टाफ मेंबर की मदद मांगते हैं. उसमे ये सदस्य एक शिकार करने वाली बंदूक के साथ गांव में पहुंचते है जो एंटनी को बिल्कुल पसंद नहीं आता. इस फिल्म में सेंट्रल किरदार भैंस ही बनी रहती है और फिल्म का विजुएल और सिनेमाटोग्राफी का स्तर हॉलीवुड के लेवल का है. इस फिल्म की कहानी सुनने में साधारण लगे लेकिन फिल्म की सिनेमाटोग्राफी और बेहतरीन स्क्रिप्ट के चलते ये अंत तक दर्शकों को बांधने का काम करती है।

फिल्म फेस्टिवल में सराहना की जा चुकी ये फिल्म भारत में भी रिलीज हो चुकी है जो , विदेशों में भी धूम मचा सकती है  इस भागदौड़ के बीच इंसानों के बीच कई इमोशन्स देखने को मिलते हैं.फिल्म के सिनेमाटोग्राफर गिरीश गंगाधरण ने अद्भुत काम किया है  आपको बता दें की जल्लिकट्टु, तमिलनाडु के ग्रामीण इलाक़ों का एक परंपरागत खेल है जो पोंगल त्यौहार पर आयोजित कराया जाता है और जिसमे बैलों से इंसानों की लड़ाई कराई जाती है।
इस खूनी खेल पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार रोक लगा दी थी । साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने अध्यादेश जारी कर इस पारंपरिक खेल को इजाजत दे दी थी, लेकिन सरकार के इस अध्यादेश को फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई 

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