सिंगल यूज प्लास्टिक की रिसाइकिलिंग का नया तरीका ढूंढा इससे मोटर ऑयल और कॉस्मेटिक्स बनेंगे

अमेरिका ने मौजूदा प्लास्टिक की रिसाइकिलिंग के तरीकों में सुधार किया

देशभर से रोजाना लगभग २५,940 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। जिस में से केवल 60% यानी 15,384 टन प्लास्टिक कचरा ही एकत्रित या रिसाइकल किया जाता है। बाकी प्लास्टिक कचरा नदी-नालों के जरिए समुद्र में चला जाता है या फिर उसे जानवर खा लेते हैं। हर साल 1.5 लाख टन से ज्यादा प्लास्टिक कचरा विदेशों से भारत आता है। इसी साल अप्रैल तक 19,305 टन कचरा विदेशों से आ चुका है।

अमेरिकी वैज्ञानिकाें तथा नाॅर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के साथ की गई संयुक्त रिसर्च में सिंगल यूज प्लास्टिक काे रिसाइकिल करने का नया तरीका ढूंढ़ निकाला है। इस प्लास्टिक काे अच्छी क्वालिटी के तरल पदार्थ में बदल  कर इसे माेटर ऑयल, लुब्रीकेंट्स, डिटर्जेंट और कॉस्मेटिक्स में बनाया जा सकता है। इस तकनीक से मौजूदा रिसाइकिलिंग में भी सुधार होगा जो घटिया क्वालिटी के प्रोडक्ट्स बनाते हैं। और इस से पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। 

इस शोध में वैज्ञानिकों बता की पहले जब प्लास्टिक को रिसाइकिल करते थे तो उससे जहरीली गैस और पदार्थ निकलते थे, लेकिन इस नए प्रयाेग में प्लास्टिक गलाने से बहुत कम जहरीली गैस और खराब पदार्थ निकलते हैं। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक प्राे. केनेथ पोपेलमीयर ने कहा- 'इस नई तकनीक की खोज से हम इसलिए खुश हैं क्योंकि दुनियाभर में जमा हो रहे प्लास्टिक के कचरे से लोगों को मुक्ति मिलेगी।
किलोग्राम प्लास्टिक इस्तेमाल करता है। अमेरिका में इससे 10 गुना ज्यादा इस्तेमाल होता है। वहां हर व्यक्ति सालाना 109 किलोग्राम प्लास्टिक प्रयाेग करता है। भारत में तकरीबन 5.5 लाख टन प्लास्टिक नदी-नालों से होते हुए समुद्र में मिल जाता है। यही स्थिति रही तो 2050 तक समुद्र में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक तैरता दिखेगा।

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