स्कूल फीस को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार को अंतरिम आदेश जारी किया है। इस आदेश से स्कूल और माता-पिता दोनों राहत महसूस कर रहे हैं।

प्राइवेट स्कूलों और उसमे पढ़ने वाले माता-पिता को उच्च न्यायालय से राहत देते हुए वर्तमान में तीन किश्तों में 70% ट्यूशन फीस का भुगतान करने का फैसला सुनाया है।

स्कूल फीस को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार को अंतरिम आदेश जारी किया है। इस आदेश से स्कूल और माता-पिता दोनों राहत महसूस कर रहे हैं। कोर्ट ने अंतरिम आदेश में कहा है कि स्कूल तीन किस्तों में ट्यूशन फीस का 70 फीसदी ले सकते हैं और फीस का भुगतान नहीं होने पर छात्र को ऑनलाइन कक्षाओं से बाहर कर सकते हैं, लेकिन स्कूल से नाम नहीं काटा जा सकता है। सोसाइटी ऑफ कैथोलिक इंस्टीट्यूशंस, प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन और अन्य शैक्षिक संगठनों द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। 

जिसमें राज्य सरकार के स्कूल फीस संग्रह स्थगन आदेश को चुनौती दी गई थी। इन संगठनों के साथ लगभग दो सौ स्कूल जुड़े हुए हैं। स्कूल संगठनों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कमलाकर शर्मा, अधिवक्ता दिनेश यादव और शैलेश प्रकाश शर्मा सहित अन्य ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को स्कूल की फीस की वसूली को निलंबित करने का आदेश नहीं दे सकती। फीस जमा करने पर रोक लगाने से स्कूल संचालकों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल तालाबंदी के बाद लगातार शिक्षक और अन्य कर्मचारियों को पूरा वेतन दे रहा है।

इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसका ध्यान रखते हुए लगातार ऑनलाइन कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश महर्षि ने कहा कि राज्य सरकार को सार्वजनिक हित में निर्णय लेने का पूरा अधिकार है। वर्तमान महामारी के इस चरण में, आर्थिक स्थिति के कारण शुल्क संग्रह को स्थगित कर दिया गया है। सभी पक्षों को सुनने के बाद, न्यायाधीश एसपी शर्मा ने अंतरिम आदेश में कहा कि राज्य सरकार द्वारा जारी शुल्क प्रशासन आदेश ने स्कूल प्रशासन की समस्याओं को ध्यान में नहीं रखा।
इसके साथ ही, माता-पिता पर पूर्ण शिक्षण शुल्क का भुगतान भी उचित और उचित नहीं होगा। इसे देखते हुए अदालत ने कुल स्कूल की फीस में से 70 प्रतिशत ट्यूशन फीस जमा करने का अंतरिम आदेश दिया है। यह राशि अभिभावकों से तीन किस्तों में ली जा सकती है। जिनमें से, अभिभावकों को 30 सितंबर तक फीस की पहली किस्त और उसके बाद 30 नवंबर और 31 जनवरी तक जमा करना होगा। इसके साथ, अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि शेष शुल्क अंतिम आदेश में तय किया जाएगा।

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